38. Vrindavan Ka Krishna Kanhaiya | वृंदावन का कृष्ण कन्हैया
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38. Vrindavan Ka Krishna Kanhaiya | वृंदावन का कृष्ण कन्हैया

P Madhav Kumar
वृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी आँखो का तारा
मन ही मन क्यों जले राधिका, मोहन तो है सबका प्यारा ॥धृ॥

जमुना तटपर नंद का लाला, जब जब रास रचाये रे
तन मन डोले कान्हा ऐसी, बन्सी मधुर बजाये रे
सुध बुध खोये खडी गोपियाँ, जाने कैसा जादू डाला ॥1॥

रंग सलोना एैसा जैसे, छायी हो घट सावन की
एरी मैं तो हूयी दिवानी, मनमोहन मनभावन की
तेरे कारण देख साँवरे, छोड दिया मैंने जग सारा ॥2॥

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