महाभारत विश्व का सबसे महान महाकाव्य है। इसे महर्षि वेदव्यास ने लिखा था और इसमें 100,000 से अधिक श्लोक हैं। यह कुरु वंश, पांडव और कौरवों के संघर्ष, तथा कुरुक्षेत्र के युद्ध की गाथा है। यह केवल युद्ध की कथा नहीं, बल्कि धर्म, कर्म, भाग्य और भक्ति की गहरी सीख देने वाला ग्रंथ भी है।
महाभारत की मुख्य कथा
कहानी की शुरुआत राजा शांतनु से होती है, जिनके वंशज आगे चलकर पांडव और कौरव बनते हैं। दुर्योधन की ईर्ष्या और छल के कारण, पांडवों को जुए में हराकर वनवास भेज दिया जाता है। कई वर्षों बाद, कुरुक्षेत्र युद्ध होता है, जहाँ श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता का उपदेश देते हैं और उन्हें धर्म का ज्ञान कराते हैं।
महाभारत के प्रमुख पात्र
श्रीकृष्ण – दिव्य मार्गदर्शक और अर्जुन के गुरु।
अर्जुन – महान योद्धा, जो युद्ध से पहले संशय में पड़ गया था।
दुर्योधन – अहंकारी राजकुमार, जिसने अपना सर्वनाश कर लिया।
युधिष्ठिर – न्यायप्रिय और धर्मपरायण राजा।
भीष्म पितामह – प्रतिज्ञाबद्ध योद्धा, जिन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया।
कर्ण – महान योद्धा, जिसे जन्म के बाद छोड़ दिया गया था।
द्रौपदी – वीरांगना, जिसने अन्याय का सामना किया।
भगवद गीता: महाभारत की आत्मा
भगवद गीता एक 700 श्लोकों वाला ग्रंथ है, जिसे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था। इसमें कर्म, धर्म, और आत्मा के महत्व को समझाया गया है।
महाभारत से सीखने योग्य बातें
धर्म सबसे बड़ा है – हमेशा धर्म का पालन करना चाहिए।
अहंकार विनाश का कारण है – दुर्योधन का घमंड उसे ले डूबा।
सत्य की जीत होती है – अंत में पांडवों की विजय हुई।
कर्तव्य ही सबसे महत्वपूर्ण है – श्रीकृष्ण ने कर्म करने की प्रेरणा दी।
निष्कर्ष
महाभारत सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला ग्रंथ है। यह हमें चुनौतियों से लड़ना, नैतिक मूल्यों का पालन करना और जीवन के गहरे अर्थ को समझना सिखाता है।
