महाभारत विश्व का सबसे महान महाकाव्य है, जो अच्छाई और बुराई, धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष की कथा कहता है। इसे महर्षि वेदव्यास ने रचा था और इसमें 100,000 से अधिक श्लोक हैं। यह सिर्फ युद्ध की कथा नहीं है, बल्कि एक दार्शनिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी है, जो आज भी मानवता को प्रेरित करता है।
मुख्य विषय: धर्म और नियति
महाभारत की कथा कुरु वंश के दो पक्षों—पांडव और कौरव—के बीच संघर्ष पर आधारित है। इसका मूल संदेश है: धर्म का पालन और भाग्य का निर्माण कर्मों से होता है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता के माध्यम से कर्म और धर्म का पाठ पढ़ाया।
प्रमुख पात्र और उनकी भूमिकाएँ
भगवान श्रीकृष्ण – अर्जुन के मार्गदर्शक और दिव्य उपदेशक।
अर्जुन – महायोद्धा जो धर्म संकट में फँसा था।
कर्ण – एक महान योद्धा, जिसका जीवन दुखों से भरा था।
द्रौपदी – साहसी रानी, जिसने अपमान का प्रतिशोध लिया।
युधिष्ठिर – सत्य और धर्म का प्रतीक।
भीष्म पितामह – प्रतिज्ञा से बंधे महायोद्धा।
दुर्योधन – अहंकारी राजकुमार, जिसकी हठधर्मिता ने उसे विनाश की ओर ले गया।
आज के युग में महाभारत का महत्व
महाभारत केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, नेतृत्व, नीति और कर्म के सिद्धांतों का ग्रंथ है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और कर्म के परिणामों को स्वीकार करना चाहिए।
निष्कर्ष
महाभारत एक अनन्त प्रेरणास्रोत है, जो सत्य, धर्म और मानवता के लिए एक मार्गदर्शक बना रहेगा। इसकी शिक्षाएँ न केवल अतीत में बल्कि आज के जीवन में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।
